पीडि़तों को नौकरियां, मकानों के मालिकाना अधिकार व बिजली के 400 युनिट माफी की सुविधा दी जाए : सिरसा
मनजिन्द्र सिंह सिरसा ने 1984 सिख कत्लेआम के पीडि़तों का मामला विधानसभा में उठाया

 

 


नई दिल्ली, शिरोमणी अकाली दल व भाजपा गठबंधन के विधायक मनजिन्द्र सिंह सिरसा ने आज विधानसभा में 1984 सिख कत्लेआम के पीडि़त परिवारों के अधिकारों का मामला उठाया तथा उन्हें नौकरियां प्रदान करने, मकानों के मालिकाना अधिकार व बिजली के 400 युनिट माफ करने की वकालत की। 

विधानसभा में यह मामला उठाते हुए श्री मनजिन्द्र सिंह सिरसा ने कहा कि 1984 के सिख कत्लेआम पीडि़त परिवार बहुत गरीब हैं, जो अपने बिजली के बिल भरने में भी सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक नीति का एलान करते हुए कहा था कि इन परिवारों के 400 युनिट बिजली के बिल माफ होंगे, पर यह बिल माफ नहीं किए गए और उल्टा जब इन परिवारों को भारी भरकम बिल भेजे गए, जिन्हें देने से वे असमर्थ रहे तो उनके बिजली कनैक्शन काटने शुरु कर दिए गए। उन्होंने विधानसभा सपीकर से अनुरोध किया कि वे सरकार को निर्देश दें कि इस मामले में सरकार द्वारा जो नीति बनाई गई थी उसे प्रभावशाली ढंग से लागु किया जाए। 

श्री सिरसा ने 1984 सिख कत्लेआम की पीडि़त विधवाओं को प्रदान किए गए मकानों का मामला उठाते हुए कहा कि इन परिवारों को इन मकानों के मालिकाना हक प्राप्त नहीं हैं और यह परिवार बहुत गरीब हैं जो इन मकानों की मरम्मत भी नहीं करवा सकते। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि इन मकानों की रिपेयर के लिए बजट में विशेष उपबंध करते हुए इनकी जल्द से जल्द मरम्मत करवाई जाए और दूसरा इन मकानों के मालिकाना अधिकार इन परिवारों को दिए जाएं ताकि यह इन्हें बेचने के समर्थ हो सकें। 

श्री सिरसा ने कहा कि केद्र सरकार ने 2006 में एक नोटीफिकेशन के जरिए यह कहा था कि 1984 के पीडि़तों को नौकरियां प्रदान करने के लिए कानून अनुसार उम्र की छूट की सीमा बढ़ाई जाए तथा इन परिवारों के सदस्यों को नौकरियां प्रदान की जाएं। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी यह बात कही थी कि अगर सरकार ने इन पीडि़तों का हाथ न पकड़ा व नौकरियां व मकानों के मालिकाना हक प्रदान न किए तो वह विधानसभा की सदस्यता से अस्तीफा दे देंगे और वह फिर दोहराते हैं कि अगर सरकार ने उनकी बात न मानी तो वे इसी सत्र में अपना अस्तीफा दे देंगे।